14.2.07

प्यार

प्यार
अंधेरे में
टिमटिमाती हुई
एक रोशनी है
जो इंसान को
अंधेरे से
कभी हारने नहीं देती ।

सीमा
१० जुलाई, १९९९

इसे 'कृत्या' पर पढ़ें

13.2.07

रायबरेली में निफ्ट

http://niftindia.com/downloads/NIFT%20ADVT.pdf


निफ्ट की स्थापना १९८६ में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत दिल्ली में किया गया था । निफ्ट की इन परिसरों में - दिल्ली, बँगलौर, चेन्नई, गाँधीनगर, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई, अब रायबरेली भी जुड़ने जा रहा है । रायबरेली में निफ्ट की आज शुरूआत - यहाँ देखें

12.2.07

निफ्ट से परिचय और सफ़र की शुरूआत

चिठ्ठों की नई श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए यहाँ लिख रही हूँ ।

जब मैंने १९९५ में शब्द-जाल लिखा था तब कदापि यह सोच कर नहीं लिखा था कि कुछ ही दिनों में मैं वास्तविक ताने-बाने, सूत और कपड़े के बारे में पढ़ूँगी और वही मेरा व्यवसाय और कार्य-क्षेत्र हो जाएगा । शब्द-जाल पर प्रियंकर जी की टिप्पणी है :

"कविता से यह प्रकट होता है कि रचनाकार का संबंध फ़ैशन टेक्नोलॉजी से है. आखिर कबीर की रचनाओं में भी तो ताना-बाना जैसे शब्द और चदरिया बुनने के प्रसंग आते हैं."

जब शब्द-जाल लिखा था तब फ़ैशन टेक्नोलॉजी से कोई संबंध नहीं था और न अधिक जानकारी थी थी इस क्षेत्र के बारे में । यह इस क्षेत्र में आने से पहले लिखा था । संयोग कह लीजिए या कुछ और .. दरसल +२ में मैंने विज्ञान विषय पढ़े थे । आम धारणा यह थी कि अगर कोई अपनी पढा़ई और भविष्य के प्रति जागरूक है तो वह या तो अभियंता बनेगा या चिकित्सक .. और कोशिश मेरी भी उसी तरफ थी, चाहे रूचि न भी थी । पर +२ के उन दो सालों में लगा मेरा रूझान कला की तरफ है और मैंने अपने मन की बात सुनने का निर्णय लिया ।

स्नातक के विषय थे चित्रकला (विशेष) और अंग्रेजी साहित्य तथा दोनों में मुझे बेहद रूचि थी। फिर निफ्ट या कपड़ों के क्षेत्र में कैसे पहुँच गई ?

स्कूल में एक सहेली थी जो कभी-कभी कहती थी कि उसे 'निफ्ट में पढ़ना है ... तब शायद पहली बार लगा कि मेरे जैसे मध्यमवर्गीय परिवार और छोटे शहरों मे रहने वाले लोग भी निफ्ट के बारे में सोच सकते हैं । निफ्ट के बारे में पढ़ा और सुना जरूर था पर उन दिनों मध्यमवर्गीय परिवारों में उसे जीविका का माध्यम बनाने के लिए उतना प्रोत्साहित नहीं किया जाता था और न लोगों को ज्यादा जानकारी थी ।

खैर, मुझे भी चित्रकला के माध्यम से नौकरी या रोजी-रोटी का जरिया पता नहीं था । बचपन से कोई व्यावसायिक कोर्स करने का लक्ष्य था और लोग डाक्टर - इंजीनीयर बनने की अपेक्षा रखते थे ... जिसमें मुझे रूचि नहीं थी । मैंने सोचा निफ्ट में भी तो व्यावसायिक कोर्स हैं; चित्रकला न सही, डिजाइन का क्षेत्र तो है, रचनात्मक क्षेत्र तो है, और रोजी-रोटी की भी चिंता भी नही रहेगी क्योंकि निफ्ट नौकरी दिलवाने में भी मदद करती है (campus placement के द्वारा) । बस चली गई प्रवेष-परीक्षा देने ।

निफ्ट में कई तरह के विषय हैं और स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम भी हैं । समय के साथ पाठ्यक्रम और विषयों और प्रवेश परीक्षा, आदि, में परिवर्तन होते रहते हैं । प्रवेश परीक्षा अखिल भारतीय स्तर के होते हैं । २००७ की प्रवेष परीक्षा और नियमों के बारे में अधिक जानकारे के लिए यहाँ देखें


** २००७ की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन पत्र खरीदने की आखिरी तरीख है १७ फरवरी '०७ ।

* निफ्ट के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें : http://niftindia.com/
बाकी मेरे अगले चिठ्ठे में जारी रहेगा । अपनी प्रतिक्रियाएँ और अगर कोई प्रश्न हो तो अवश्य लिखें ।

7.2.07

मुठ्ठी भर मीठी रौशनी

तुम्हारे मौन ने
कही थी कहानी ।
सुना था मैंने
अनगिनत,
मीठे गीत,
इन्हीं आँखों की जुबानी ।
एक मीठा सा
एहसास भी था
जिसे मैंने
मुठ्ठी में बंद कर
समेट लेने की
कोशिश भी की थी ।
पर जान गई हूँ
एहसास मुठ्ठी में
बंद नहीं हुआ करते ।
रौशनी के तरह
बस उजाला फैला जाते हैं
जैसे आज भी फैला है
तुमसे मेरे जीवन में ।

- सीमा कुमार
६ फरवरी, २००७
(शादी की सालगिरह पर ।)

1.2.07

'मेरी कृति' और हिन्दी चिठ्ठाकारी का एक साल

जब मैंने अपना पहला हिन्दी चिठ्ठा लिखा था - और भी हैं रास्ते और कहा था :

फिर से राहें कहती हैं
आओ,
कदम बढाओ,
पाने को मंजिलें अभी और भी हैं /
मंजिलें जो हासिल हैं
वहाँ से शुरू होते
नई मंजिलों की ओर
रास्ते अभी और भी हैं /
वास्तव में मैं कुछ नए रास्तों की ओर बढ़ रही थी .. मंजिलें तो अब भी मिली नहीं हैं पर सफर अब भी जारी है । चिठ्ठाकारी भी एक नया सफर था । वैसे तो मैं चिठ्ठाकारी के एक साल होने पर यहाँ लिख चुकी हूँ मेरे अंग्रेजी चिठ्ठे पर । पर मैं फिर आज यहाँ खासकर धन्यवाद देना चहूँगी रवि कामदार का जिन्होंने हिन्दी चिठ्ठा शुरु करने में कफी मदद की और अनूप भार्गव जी का जिन्होंने मुझे हिन्दी लिखना सीखने और बरहा को लेकर काफी मदद की । इनके अलावा उन सभी का जो मेरी कृति को पढ़ने आते रहे और मेरा उत्साह बढ़ाते रहे ।

मेरी कृति की शुरुआत मैंने कविताओं के लिए की थी पर अब गद्य भी लिखना शुरु कर दिया है । कविताओं को मैं अब भी अलग रखना चहती हूँ । उसके लिए आज ही से एक नया चिठ्ठा शुरु कर रही हूँ - शब्द-जाल ... The Web of Words
[ http://seemaspoems.blogspot.com/ ]

नहीं, यह नया चिठ्ठा नहीं है जहाँ मैं कुछ नया लिखूँगी - यहाँ सिर्फ मेरी कविताओं के लिंक होंगे जो कि मैंने अपने वर्तमान चिठ्ठों पर लिखती हूँ, उनकी लेखन तिथि के क्रमानुसार । और साथ ही अपनी कुछ पसंदीदा कविताओं के लिंक भी इकठ्ठे करूँगी वहाँ :) ।