5.3.07

चिठ्ठा-जगत में वापस


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सीमाकुमार:- मैंने सीमाजी से कहा था कि वे फैशन डिजाइनिंग वगैरह से जुड़ी बातें बताते हुये लिखना शुरू करें। उन्होंने हां भी कहा था। लेकिन अभी तक उन्होंने केवल कुछेक कविताऒं और चंदेक सूचनाओं से आगे लिखना शुरू नहीं किया है। हमें उनके बहुमुखी लेखन का इंतजार है।"


और जैसा कि मैंने कहा, अपना कहा मुझे अच्छी तरह याद है । हाँ, लिखने की गति थोडी़ (या बहुत ) धीमी है । पर लिखूँगी जरूर :)। कुछ समय से अपने परिवार के एक सपने को पूरा करने की तरफ भी कुछ काम कर रही हूँ जिसमें काफी समय लग जाता है । और मेरे भाई की शादी भी थी ।




शादी की बात आती है तो पारंपरिक शादी एक दिन की तो होती नहीं । हल्दी लगाने आदि की रस्म से शुरू होकर, शादी के बाद भी कई रस्में कई दिनो तक चलती रह्ती हैं । वैसे आजकल की भाग-दौड़ की ज़िन्दगी में यह रस्में भी कम और छोटी होती जा रही हैं । इन रस्मों का भी अपना मज़ा है ... पर आजकल वक्त कहाँ है, नौकरीपेशा लोगों के पास छुट्टियाँ कहाँ हैं ? खैर, जितने थोड़े दिनों की भी छुट्टी मिली, और शादी की भीड़-भाड़ में जितना हो सकता था मिलना-जुलना, खाना-पीना, मौज-मस्ती, सब किया ।



इसी दौरान पता चला कि मेरा आफिस यहाँ बंद होकर दूसरे शहर जाने वाला है, जो एक अलग विचारणीय बात हो गई थी । पर फिर पता चला कि यह निर्णय अभी रद्द हो गया है । इन्हीं सब बातों में उलझी आज काफी दिनों के बाद चिठ्ठा-जगत में वापस आई हूँ । अब फिर से नियमित लिखने का प्रयास जारी रहेगा । और फिर ये छोटे-मोटे अंतराल तो आते ही रहेंगे ।

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