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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

हर लम्हा एक विस्मय - पढ़ें हिन्दी में, अंग्रेज़ी में और सुनें भी

जब मैंने हर लम्हा एक विस्मय लिखा था तो सोचा नहीं था उसे विकास कुमार की इतनी अच्छी आवाज़ मिलेगी । सुनने का तो आनंद ही कुछ और आया । धन्यवाद विकास :) जो अभी तक मेरी हिन्दी कविताएँ पढ़ते रहे हैं उन्हें यह बताना चाहूँगी कि हर लम्हा एक विस्मय दरसल मेरी अंग्रेज़ी कविता Each Moment is a Wonder का हिन्दी रूपांतर है । मराठी लेखक-कवि सलील वाघ जी ने जब इसे पढा़ तो मुझसे कहा कि इसी कविता को हिन्दी में लिखूँ - पर वह अनुवाद न हो । उनका अभिप्राय था कि अंग्रेज़ी कविता के भाव हिन्दी में हों । मैंने कहा यह तो बहुत मुश्किल काम है (और वास्तव में इसे हिन्दी में लिखते समय ऐसा लगा भी) । पहले तो मुझे लगा कि यह नहीं हो पाएगा । पर उनकी बात पर अमल करके देखना भी चाहती थी कि क्या बन कर आता है और वह ऐसा क्यों कह रहे हैं क्योनंकि पहले मैंने ऐसा कभी किया भी नहीं था । आखिरकार हिन्दी में लिख तो दिया पर कई जगह समझौता करना पड़ा और फिर भी मुझे लगा कि अंग्रेजी कविता वाली पूरी बात इसमें नहीं आ पाई ... खासकर आखिरी पंक्तियाँ । अंग्रेजी में लिखा : They all kept repeating to me Live, love, evolve, enjoy and cherish Each little m...

पराग और पंखुड़ियाँ

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पराग और पंखुड़ियाँ मैंने जून माह की यूनिकवि प्रतियोगिता के लिए भेजी थी । कविता ८वें पायदान पर रही और पुरस्कार- कवि कुलवंत सिंह की ओर से उनकी काव्य-पुस्तक 'निकुंज' की स्वहस्ताक्षरित प्रति जिसका मुझे इंतजार है । इस कविता में 'अरहुल' शब्द का प्रयोग गुड़हल के फूल के लिए किया गया है । जहाँ मैं पली-बढी़ वहाँ 'अरहुल' का प्रयोग आम भाषा में किया जाता था.. इसीलिए मैंने 'अरहुल' का ही प्रयोग किया है । पराग और पंखुड़ियाँ मेरे +२ के दिनों की लिखी हुई है । सुनील डोगरा ज़ालिम ने टिप्पणी दी है "वैसे अरहुल के फूल कॊ देखने की इच्छा हॊ रही है काश आपने चित्र दिया हॊता।" हिन्द-युग्म पर तो नहीं लगा पाई, पर यहाँ लगा रही हूँ । यह श्याम-श्वेत 'लीनो-कट ग्रफिक प्रिंट' मेरे स्नातक के समय की मेरी कृति है जिसमें अरहुल (गुड़हल) को दिखाया गया है । कृति: सीमा कुमार, १९९७

कविता क्या है.. ?

मेरी अभिव्यक्ति की असमर्थता कल हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हुई । पढ़ कर वहाँ अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें । बचपन से कुछ न कुछ लिखती रही हूँ । जब लिखा तब अपने मन से लिखा .. किसी उद्देश्य को लेकर शायद ही कभी लिखा । कहीं प्रकाशित करने के उद्देश्य से भी नहीं लिखा । हाँ, धीरे-धीरे, समय के साथ औरों के साथ बाँटने लगी । एक आम इंसान की तरह, ज़िदगी की कश्मकश और अलग-अलग रास्तों तथा अनुभवों से गुजरते हुए, मन में जब तरह-तरह के भाव उठते हैं, संवेदनाएँ होती हैं, सवाल उठते हैं, और यह सभी सशक्त होते हैं और उन्हें अभिव्यक्त करने की इच्छा होती है, तो उन्हें शब्दों में ढ़ालने की कोशिश करती हूँ । कागज - कलम और शब्द, यह अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाते हैं । परंतु लिखने के बाद कई बार कई सवाल भी उठ खड़े होते हैं ... एक बहुत आम सा सवाल है "कविता क्या है ?" हर चीज की सुंदर अभिव्यक्ति, छंदो से सुसज्जित रचना ही क्या कविता है ? क्या लिखते समय भावों के प्रवाह से अधिक आवश्यक रचना की रूप-रेखा, उसकी साज-सज्जा, या लेखन के नियम-कानून पर ध्यान देना है ? कविता की सार्थकता किस बात में होती है ? लिखने का क्या उद्देश्य होना च...