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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

मेरे अंदर के मानव

मैं एक मानव हूँ पर मेरे अंदर कई और मानव हैं – अनगिनत, अनदेखे मानव जो छिपे रहते हैं मेरे अंदर । क्रोध, विनय, विचार, संवेदना, बुद्धि, आत्म-सम्मान, जैसे कितने ही नाम हैं उनके । समय-समय पर अलग-अलग मानव मेरे इस बाहरी मानव पर हावी होते रहते हैं । कभी किसी एक की अह्मियत बढ़ जाती है तो बाकी सभी की अह्मियत नगण्य हो जाती है । इसी प्रकार सभी की अह्मियत सभी का प्रभाव बारी-बारी से घटता-बढ़ता रहता है । ये सभी भीतरी मानव मिलकर बनाते हैं मेरे बाहरी मानव को; मुझको … पर दुनिया केवल मुझे देखती है- मेरे बाहरी मानव को … और मेरे अंदर के मानव रह जाते हैं छिपे मेरे अंदर । इन सब पर मेरे बाहरी मानव का रूप र्निभर करता है; ये सभी नींव की ईंट बने रह जाते हैं जिन पर मेरे बाहरी मानव की मजबूती तो र्निभर करती है पर वो ख़ुद दुनिया की आँखों से रह जाते हैं अनदेखे … अनजाने ... । –सीमा 2 जून, 1993