मैं बादल का एक टुकड़ा हूँ और तुम बरखा की शीतल बूँदें | मैं खाली - खाली सा बादल का एक टुकड़ा और तुम्हारा प्यार बादल टुकडे को भर देने वाली, उसे उसका स्वरूप देने वाली जल की असंख्य बूँदें | मैं बादल का एक छोटा सा टुकड़ा और तुम मेरा पूरा आसमान, मैं सीमाओं से निर्मित और तुम अनंत आकाश - सीमा कुमार १७/६/९९ * यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं |