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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

हर लम्हा एक विस्मय

ठहरा हुआ पानी एक छोटा सा कंकड़ या एक हल्का सा स्पर्श और उठी असंख्य, अनगिनत लहरें; पानी की सतह पर खिली असंख्य तरंगें.. । लहरें मेरी ओर आती रहीं और वापस जा कहीं दूर विलीन होती रहीं । तट पर खड़ी मैं उन अनगिनत लहरों को एक एक कर गिनने की कोशिश करती रही । मेरे स्याह केश को उड़ाता हुआ निकल चला आकाररहित पवन और जागी एक तीव्र इच्छा उस शक्लरहित पवन को आलिंगन में लेने की । वक्त रेत की तरह फिसलता रहा मेरी भिंची हुई मुठ्ठियों से और मैं रेत के एक-एक कण को बिना आहट फर्श पर तरलता से बिखरते देखती रही । बगिया के खिले हुए फूलों के बीच हुआ एहसास यह कोमल पंखुड़ियाँ हैं बस कुछ पल के मेहमान । उनकी मोहक खुशबू ने कहा उठा लो आनंद इससे पहले कि मैं हो जाऊँ लुप्त । यह सभी याद दिलाते रहे दोहराते रहे मुझसे - जीयो, प्रेम करो, हो उत्क्रांत और करो आत्म-उत्थान, हो आनंदित और संजो कर रखो हर नन्हें पल को वक्त के हर कतरे को क्योंकि हर लम्हा अपने आप में है एक चमत्कार, एक विस्मय । - सीमा कुमार २० जुलाई, २००७ यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहा...