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मार्च, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

मेरे कैमरे से निफ्ट की कुछ तस्वीरें

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चिठ्ठा-जगत में वापस

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फुरसतिया जी का कहना है : " सीमाकुमार :- मैंने सीमाजी से कहा था कि वे फैशन डिजाइनिंग वगैरह से जुड़ी बातें बताते हुये लिखना शुरू करें। उन्होंने हां भी कहा था। लेकिन अभी तक उन्होंने केवल कुछेक कविताऒं और चंदेक सूचनाओं से आगे लिखना शुरू नहीं किया है। हमें उनके बहुमुखी लेखन का इंतजार है। " और जैसा कि मैंने कहा, अपना कहा मुझे अच्छी तरह याद है । हाँ, लिखने की गति थोडी़ (या बहुत ) धीमी है । पर लिखूँगी जरूर :)। कुछ समय से अपने परिवार के एक सपने को पूरा करने की तरफ भी कुछ काम कर रही हूँ जिसमें काफी समय लग जाता है । और मेरे भाई की शादी भी थी । शादी की बात आती है तो पारंपरिक शादी एक दिन की तो होती नहीं । हल्दी लगाने आदि की रस्म से शुरू होकर, शादी के बाद भी कई रस्में कई दिनो तक चलती रह्ती हैं । वैसे आजकल की भाग-दौड़ की ज़िन्दगी में यह रस्में भी कम और छोटी होती जा रही हैं । इन रस्मों का भी अपना मज़ा है ... पर आजकल वक्त कहाँ है, नौकरीपेशा लोगों के पास छुट्टियाँ कहाँ हैं ? खैर, जितने थोड़े दिनों की भी छुट्टी मिली, और शादी की भीड़-भाड़ में जितना हो सकता था मिलना-जुलना, खाना-पीना, मौज-मस्ती, सब कि...