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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

प्रकृति और पंक्षियों को अर्पित मेरी कृति

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प्रकृति और पंक्षियों को अर्पित - वस्त्रों ( टी-शर्ट्स ) के लिए मेरी कृति : वीडियो - प्रकृति और पंक्षियों से प्रेरित डिज़ाइन:  और पढ़ें ... फेसबुक इंस्टाग्राम वेबसाइट   ---

सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की सैर

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बाल-उद्यान पर सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की सैर . यह तस्वीरें पिछले साल की हैं जब हम अलवर और सरिस्का घूमने गए थे. कुछ तस्वीरें मेरे अंग्रेज़ी चिठ्ठे पर भी हैं. सभी फोटो : सीमा कुमार --------

पिता के लिए

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बाल-उद्यान पर कुछ तस्वीरें- भोला बचपन... पिता की छाँव में और यहाँ कुछ अन्य तस्वीरें तस्वीरें - सीमा कुमार

तेजल और बचपन के खेल ..

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तेजल की विडियो बाल-उद्यान पर .. जिसे देखकर बचपन प्यारा लगने लगे और यहाँ कुछ नई तस्वीरें ... .. उसके पसंदीदा परिधान में

बाल-उद्यान पर नई प्रविष्टियाँ

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बाल-उद्यान पर नई प्रविष्टियाँ : 1) भोला बचपन.. आओ खेलें खेल 2) पुस्तक मेला - एक झलक

कुछ नई प्रविष्टियाँ

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कुछ नई प्रविष्टियाँ :- * हिन्द-युग्म पर मेरी कविता : बादल का एक टुकड़ा मैं बादल काएक टुकड़ा हूँ और तुम बरखा की शीतल बूँदें.... [ पूरा पढ़ें ] * बाल-उद्यान पर - देखो मैने आटा गूँधा... * यह विडियो जिसमें तेजल के स्कूल में हुए कार्यक्रम में उसने कविताएँ सुनाई थी । और यह रही स्कूल की कुछ और तस्वीरें...

बाल उद्यान पर 'भोला बचपन' और 'दुर्गा-पूजा की सैर'

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बाल उद्यान पर : कीजिये दुर्गा-पूजा की सैर याद कीजिये अपना भोला बचपन

नन्हें खिलाड़ी :)

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वैसे तो यह तस्वीरें मैं यहाँ प्रकाशित कर चुकी हूँ पर २०-२० वर्ल्ड कप जीतने के बाद मेरा फिर से यहाँ प्रकाशित करने का मन किया । बल्ला उठे या न उठे, ये खेलने को तैयार हैं .. तो आप भी इन नन्हें खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएँ ।

नई प्रविष्टियाँ

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यह रही मेरी बिटिया जो माँ के लिए रोटियाँ बना रही है - और देखिए बाल-उद्यान पर । और यह कुछ पंक्तियाँ यूँ ही बैठे - बैठे .. कुछ गलतियाँ भी रह गई हैं ।

मेरी कुछ रचनाएँ-- 'हिन्द-युग्म' और 'बाल-उद्यान' पर

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बहुत दिन हो गए मुझे यहाँ कुछ लिखे । घर में एक-एक कर सभी को बुखार, आफिस और साथ ही अन्य व्यस्तताएँ.. कि सोचती ही रह गई फुर्सत से लिखूँगी । 'फुर्सत' सोचने की भी फुर्सत नहीं मिलती !! पर मैं लिखती रही हूँ नियमित रूप से कुछ सामूहिक प्रायासों में जो नीचे हैं.. अपनी मूल्यवान राय और टिप्पणियाँ अवश्य दीजिएगा उन्हें पढ़कर । मेरी कुछ कविताएँ ' हिन्द-युग्म ' पर पर पढ़ी जा सकती हैं : # अंतर्द्वन्द्व - एक नई कविता.. रोज़ जलाती हूँ खुद को रोज़ प्रज्वलित होती है एक आग इस आशा में - स्वयं के ही हवन कुंड में स्वाहा हो जाऊँ और उस राख से पुनर्निमित हो निकल आऊँ निर्मल मैं फीनिक्स की तरह ... [पूरा पढें] # नींद, डर और आँसू - नींद, डर और आँसू पर अलग-अलग कुछ पंक्तियाँ आँसू .... जज़्बात का दरिया है … जो छलक गई बूँदें तो एक-एक बूँद एक तेज़ धार बन जाएगी और हर बाँध निरर्थक .. [पूरा पढें] # स्वप्न की डोरी स्वप्न की अद्भुत डोरी रोज़ रात बाँधती है मुझे बातों में कोरी-कोरी ... [पूरा पढें] # सफ़र अभी है बाकी मिलती गई कई मंज़िलें ऊँचे रहे हम उड़ते सोने की चिड़िया की फिर भी बहुत उड़ान अभी है बाकी ... [पूरा पढ...

हर लम्हा एक विस्मय - पढ़ें हिन्दी में, अंग्रेज़ी में और सुनें भी

जब मैंने हर लम्हा एक विस्मय लिखा था तो सोचा नहीं था उसे विकास कुमार की इतनी अच्छी आवाज़ मिलेगी । सुनने का तो आनंद ही कुछ और आया । धन्यवाद विकास :) जो अभी तक मेरी हिन्दी कविताएँ पढ़ते रहे हैं उन्हें यह बताना चाहूँगी कि हर लम्हा एक विस्मय दरसल मेरी अंग्रेज़ी कविता Each Moment is a Wonder का हिन्दी रूपांतर है । मराठी लेखक-कवि सलील वाघ जी ने जब इसे पढा़ तो मुझसे कहा कि इसी कविता को हिन्दी में लिखूँ - पर वह अनुवाद न हो । उनका अभिप्राय था कि अंग्रेज़ी कविता के भाव हिन्दी में हों । मैंने कहा यह तो बहुत मुश्किल काम है (और वास्तव में इसे हिन्दी में लिखते समय ऐसा लगा भी) । पहले तो मुझे लगा कि यह नहीं हो पाएगा । पर उनकी बात पर अमल करके देखना भी चाहती थी कि क्या बन कर आता है और वह ऐसा क्यों कह रहे हैं क्योनंकि पहले मैंने ऐसा कभी किया भी नहीं था । आखिरकार हिन्दी में लिख तो दिया पर कई जगह समझौता करना पड़ा और फिर भी मुझे लगा कि अंग्रेजी कविता वाली पूरी बात इसमें नहीं आ पाई ... खासकर आखिरी पंक्तियाँ । अंग्रेजी में लिखा : They all kept repeating to me Live, love, evolve, enjoy and cherish Each little m...

कविता क्या है.. ?

मेरी अभिव्यक्ति की असमर्थता कल हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हुई । पढ़ कर वहाँ अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें । बचपन से कुछ न कुछ लिखती रही हूँ । जब लिखा तब अपने मन से लिखा .. किसी उद्देश्य को लेकर शायद ही कभी लिखा । कहीं प्रकाशित करने के उद्देश्य से भी नहीं लिखा । हाँ, धीरे-धीरे, समय के साथ औरों के साथ बाँटने लगी । एक आम इंसान की तरह, ज़िदगी की कश्मकश और अलग-अलग रास्तों तथा अनुभवों से गुजरते हुए, मन में जब तरह-तरह के भाव उठते हैं, संवेदनाएँ होती हैं, सवाल उठते हैं, और यह सभी सशक्त होते हैं और उन्हें अभिव्यक्त करने की इच्छा होती है, तो उन्हें शब्दों में ढ़ालने की कोशिश करती हूँ । कागज - कलम और शब्द, यह अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाते हैं । परंतु लिखने के बाद कई बार कई सवाल भी उठ खड़े होते हैं ... एक बहुत आम सा सवाल है "कविता क्या है ?" हर चीज की सुंदर अभिव्यक्ति, छंदो से सुसज्जित रचना ही क्या कविता है ? क्या लिखते समय भावों के प्रवाह से अधिक आवश्यक रचना की रूप-रेखा, उसकी साज-सज्जा, या लेखन के नियम-कानून पर ध्यान देना है ? कविता की सार्थकता किस बात में होती है ? लिखने का क्या उद्देश्य होना च...

चिठ्ठा-जगत में वापस

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फुरसतिया जी का कहना है : " सीमाकुमार :- मैंने सीमाजी से कहा था कि वे फैशन डिजाइनिंग वगैरह से जुड़ी बातें बताते हुये लिखना शुरू करें। उन्होंने हां भी कहा था। लेकिन अभी तक उन्होंने केवल कुछेक कविताऒं और चंदेक सूचनाओं से आगे लिखना शुरू नहीं किया है। हमें उनके बहुमुखी लेखन का इंतजार है। " और जैसा कि मैंने कहा, अपना कहा मुझे अच्छी तरह याद है । हाँ, लिखने की गति थोडी़ (या बहुत ) धीमी है । पर लिखूँगी जरूर :)। कुछ समय से अपने परिवार के एक सपने को पूरा करने की तरफ भी कुछ काम कर रही हूँ जिसमें काफी समय लग जाता है । और मेरे भाई की शादी भी थी । शादी की बात आती है तो पारंपरिक शादी एक दिन की तो होती नहीं । हल्दी लगाने आदि की रस्म से शुरू होकर, शादी के बाद भी कई रस्में कई दिनो तक चलती रह्ती हैं । वैसे आजकल की भाग-दौड़ की ज़िन्दगी में यह रस्में भी कम और छोटी होती जा रही हैं । इन रस्मों का भी अपना मज़ा है ... पर आजकल वक्त कहाँ है, नौकरीपेशा लोगों के पास छुट्टियाँ कहाँ हैं ? खैर, जितने थोड़े दिनों की भी छुट्टी मिली, और शादी की भीड़-भाड़ में जितना हो सकता था मिलना-जुलना, खाना-पीना, मौज-मस्ती, सब कि...

रायबरेली में निफ्ट

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http://niftindia.com/downloads/NIFT%20ADVT.pdf निफ्ट की स्थापना १९८६ में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत दिल्ली में किया गया था । निफ्ट की इन परिसरों में - दिल्ली , बँगलौर , चेन्नई , गाँधीनगर , हैदराबाद , कोलकाता और मुंबई , अब रायबरेली भी जुड़ने जा रहा है । रायबरेली में निफ्ट की आज शुरूआत - यहाँ देखें ।

निफ्ट से परिचय और सफ़र की शुरूआत

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चिठ्ठों की नई श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए यहाँ लिख रही हूँ । जब मैंने १९९५ में शब्द-जाल लिखा था तब कदापि यह सोच कर नहीं लिखा था कि कुछ ही दिनों में मैं वास्तविक ताने-बाने, सूत और कपड़े के बारे में पढ़ूँगी और वही मेरा व्यवसाय और कार्य-क्षेत्र हो जाएगा । शब्द-जाल पर प्रियंकर जी की टिप्पणी है : "कविता से यह प्रकट होता है कि रचनाकार का संबंध फ़ैशन टेक्नोलॉजी से है. आखिर कबीर की रचनाओं में भी तो ताना-बाना जैसे शब्द और चदरिया बुनने के प्रसंग आते हैं." जब शब्द-जाल लिखा था तब फ़ैशन टेक्नोलॉजी से कोई संबंध नहीं था और न अधिक जानकारी थी थी इस क्षेत्र के बारे में । यह इस क्षेत्र में आने से पहले लिखा था । संयोग कह लीजिए या कुछ और .. दरसल +२ में मैंने विज्ञान विषय पढ़े थे । आम धारणा यह थी कि अगर कोई अपनी पढा़ई और भविष्य के प्रति जागरूक है तो वह या तो अभियंता बनेगा या चिकित्सक .. और कोशिश मेरी भी उसी तरफ थी, चाहे रूचि न भी थी । पर +२ के उन दो सालों में लगा मेरा रूझान कला की तरफ है और मैंने अपने मन की बात सुनने का निर्णय लिया । स्नातक के विषय थे चित्रकला (विशेष) और अंग्रेजी साहित्य तथा दोनों म...

'मेरी कृति' और हिन्दी चिठ्ठाकारी का एक साल

जब मैंने अपना पहला हिन्दी चिठ्ठा लिखा था - और भी हैं रास्ते और कहा था : फिर से राहें कहती हैं आओ, कदम बढाओ, पाने को मंजिलें अभी और भी हैं / मंजिलें जो हासिल हैं वहाँ से शुरू होते नई मंजिलों की ओर रास्ते अभी और भी हैं / वास्तव में मैं कुछ नए रास्तों की ओर बढ़ रही थी .. मंजिलें तो अब भी मिली नहीं हैं पर सफर अब भी जारी है । चिठ्ठाकारी भी एक नया सफर था । वैसे तो मैं चिठ्ठाकारी के एक साल होने पर यहाँ लिख चुकी हूँ मेरे अंग्रेजी चिठ्ठे पर । पर मैं फिर आज यहाँ खासकर धन्यवाद देना चहूँगी रवि कामदार का जिन्होंने हिन्दी चिठ्ठा शुरु करने में कफी मदद की और अनूप भार्गव जी का जिन्होंने मुझे हिन्दी लिखना सीखने और बरहा को लेकर काफी मदद की । इनके अलावा उन सभी का जो मेरी कृति को पढ़ने आते रहे और मेरा उत्साह बढ़ाते रहे । मेरी कृति की शुरुआत मैंने कविताओं के लिए की थी पर अब गद्य भी लिखना शुरु कर दिया है । कविताओं को मैं अब भी अलग रखना चहती हूँ । उसके लिए आज ही से एक नया चिठ्ठा शुरु कर रही हूँ - शब्द-जाल ... The Web of Words [ http://seemaspoems.blogspot.com/ ] नहीं, यह नया चिठ्ठा नहीं है जहाँ मैं कुछ...

तेजल कृति का दूसरा जन्मदिन

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तेज भरा हो तुममें तेजल कृतियाँ हों तेरी अनमोल । आँखों में हो सुंदर सपने और होठों पर मीठे बोल । रचना ऐसा कुछ, करना ऐसा कुछ, जिसका नहीं हो कोई मूल्य । बन जाना तुम, इस सृष्टि की तेज से भरी कृति अमूल्य । - सीमा २७ जनवरी, २००७ * कल, २६ जनवरी '०७ को, मेरी बेटी तेजल कृति दो साल की हो गई । यहाँ लिखे कुछ शब्द उसके लिए तथा कुछ मेरे अंग्रेजी चिठ्ठे पर भी ।

'फार्मूला 69': आई. आई. टी.- दिल्ली में बनी सिनेमा देख्नने के बाद

जब मैंने आई. आई. टी. - दिल्ली में बनी सिनेमा 'फार्मूला 69' के बारे में पिछली बार लिखा था तो सोचा सिनेमा देख्नने के बाद भी कुछ लिखूँ, सो यहाँ लिखा ।

'फार्मूला 69': आई. आई. टी.- दिल्ली में बनी सिनेमा

आई. आई. टी. - दिल्ली में बनी सिनेमा 'फार्मूला 69', जिसमें मेरे भाई आशीष कुमार लाल ने भी काम किया है, के बारे में और अधिक पढे यहाँ ।