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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

नन्हा सा पल

मेरे एक पल ने आज फिर मुझसे कहा है मैं तुम्हारे संग अपना वह नन्हा सा पल बाँट लूँ जो अब तक बस मेरा होकर रहा है । वह पल जिसमें सिर्फ मैं हूँ, वह नन्हें कण सा नन्हा पल जिसमें सिमट कर मैं भी एक कण सी हो गई हूँ और उसमें सिमट गए हैं मेरे दुःख-सुख, मेरे आँसू और खुशी, आशा और निराशा, प्रेम और नफरत, दर्द और चुभन, तृष्णा और अभिलाषा, उल्लास और अवसाद । वह पल बस मेरा ही होकर नहीं रहना चाहता वह तुम्हारा भी होना चाहता है । तुम्हारा भी तो ऐसा ही नन्हें कण सा कोई पल होगा, तुम्हारा बिल्कुल अपना, केवल तुम्हारा पल ... । क्या बाँटोगे मेरे पल के साथ तुम अपना पल ? - सीमा कुमार १६/६/२००१ * यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहां  पढ़ी जा सकती हैं |