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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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'कृत्या' पर मेरी हिन्दी कविताएँ

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कृत्या के दिसम्बर अंक में मेरी कुछ हिन्दी कविताएँ ' समकालीन कविता ' भाग में प्रकाशित हुई हैं । बाकी की प्रकाशित कविताएँ यहाँ हैं । यह कविताएँ मेरी नई एवँ पिछ्ले कुछ सालों की कविताओं में से चुनी गई हैं । कृत्या के   ' समकालीन कविता '  भाग में प्रकाशित    मेरी कुछ हिन्दी कविताएँ  

'फार्मूला 69': आई. आई. टी.- दिल्ली में बनी सिनेमा देख्नने के बाद

जब मैंने आई. आई. टी. - दिल्ली में बनी सिनेमा 'फार्मूला 69' के बारे में पिछली बार लिखा था तो सोचा सिनेमा देख्नने के बाद भी कुछ लिखूँ, सो यहाँ लिखा ।

'फार्मूला 69': आई. आई. टी.- दिल्ली में बनी सिनेमा

आई. आई. टी. - दिल्ली में बनी सिनेमा 'फार्मूला 69', जिसमें मेरे भाई आशीष कुमार लाल ने भी काम किया है, के बारे में और अधिक पढे यहाँ ।

खुशियों की दीवाली

एक-एक दीप जला कर जगमाती है दीवाली। खुशी का लम्हा-लम्हा जोड़कर आती है खुशहाली। खुशियों के दीपों से हर दिन जगमगाए दीवाली। - सीमा कुमार २५ अक्टूबर, २००६

दो पल

एक पल जो मेरा है, एक पल जो तुम्हारा है, आओ मिल कर बाँट लें । फिर हम दोनों के दो – दो पल हो जाएँगे साथ – साथ । – सीमा 11 जून, 1998

बादल

बादल का एक टुकड़ा आसमान में आकर मेरी आँखों में अनंत आशाएँ दे गया तो क्या हुआ जो बादल नहीं, बस आँखें बरसीं - सीमा कुमार २४ अगस्त '०६

एक और त्रिवेणी

विषय : गुरूर एहसास तक नहीं था मुझे अपने होने का नाज़ तुम्हारे साथ होने का जरूर था तुम मेरे हुए, अपने आप पर गुरूर आ गया सीमा १२ अगस्त '०६