12.10.15

कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर उपलब्ध

कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर उपलब्ध

मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर भी उपलब्ध है। कृपया पढ़कर अपनी राय अवश्य दें:


मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर उपलब्ध


जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट में  लिखा था राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा 2015 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ मेरी (सीमा कुमार, सह आचार्य, निफ्ट, चेन्नई) हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया गया। किताब का लोकार्पण निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनिता मनोहर ने किया। विमोचन में संस्थान के उप निदेशक, मेरे पति एवं माता-पिता भी सहभागी रहे। किताब का प्रकाशन हिंद युग्म प्रकाशन, नई दिल्ली, ने किया है। 

विमोचन के दौरान निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनीता मनोहर
द्वारा हिन्द युग्म प्रकाशन के श्री शैलेश भारतवासी का स्वागत 

पुस्तक विमोचन के दौरान निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका
द्वारा कवियित्री के माता-पिता का स्वागत
हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का विमोचन

हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का विमोचन

निफ्ट, चेन्नई, हिन्दी पखवाड़ा के दौरान कविता-संग्रह
“पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन

हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का विमोचन


संक्षिप्त परिचय : 

'पराग और पंखुड़ियाँ' के बारे में :-
अकथित भावनाओं को व्यक्त करने और बालपन के निःशब्द प्रेम को भावों और शब्दों में अभिव्यक्त करने की कोशिश करते-करते, कच्चे-पक्के, टूटे -फूटे शब्दों को जोड़ कर, सीमा बचपन में कब  लिखने लगी, पता ही नहीं चला । 'पराग और पंखुड़ियाँ ' इनमें  से उनकी अलग-अलग उम्र के कई भावों को प्रस्तुत कर  रहा है ।

इस संकलन में कहीं अपने लिए सपने देखती उत्साहपूर्ण लड़की है तो कहीं अंतर्द्वंद्व में उलझी किशोरी, कहीं अपनी आजीविका के लिए महानगरी की अन्धी दौड़ में भागते हुए अपना स्थान ढूंढती एक छोटे शहर की कर्मठ बाला तो कहीं अपनी नन्ही परी के भविष्य का ताना-बाना बुनती माँ । उनकी अलग-अलग उम्र के कुछ पड़ावों और भावों का संकलन हैं  "पराग और पंखुड़ियाँ" । पुस्तक में प्रकाशित चित्रांकन भी कवयित्री ने स्वयं किया है । यह कविता संग्रह हिन्द युग्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है ।

कवियित्री का परिचय :- 
बिहार में जन्म हुआ । शुरुआती पढ़ाई धनबाद, झारखंड, के अंग्रेजी  माध्यम 'डी नोबिली स्कूल' (मुगमा) में हुई जहाँ सीमा लाल के नाम से लेखन शुरू किया । इनका मानना है कि हिन्दी और साहित्य के प्रति प्रेम परिवार, विशेष कर माँ और नानी से विरासत में मिला । १२वीं में व्याव्सायिक हितों  ध्यान में रखकर विज्ञान की पढ़ाई की परंतु अपना रुझान कला और साहित्य की ओर देखकर बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान, से चित्रकला (विशेष) तथा अंग्रेजी विषयों में  स्नातक किया । यहाँ चित्रकला प्रदर्शनियों में सक्रिय भागीदारी के साथ - साथ 'राजस्थान ललित कला अकादमी', जयपुर, द्वारा सत्रहवीं छात्र कला प्रदर्शनी (१९९७) मे 'आफ्टर स्टडी' नामक 'कोलाज' के लिए पुरस्कृत भी की गईं ।

राष्ट्रीय फ़ैशन तकनीकी संस्थान (NIFT), मुम्बई, से 'निटवेयर डिज़ाइन' में स्नातकोत्तर (१९९८-२०००) पूरा करने के बाद मुंबई में ही डिज़ाइनर के रूप में  नौकरी शुरू की । आठ वर्ष  मुंबई - सिलवासा, दिल्ली – लुधियाना - गुड़गाँव में  मूलतः निर्यात प्रतिष्ठानों में कार्य करने के बाद २००८ में वह फैशन के व्यावसायिक शिक्षा  संस्थानों  की ओर अग्रसर हुईं । निफ्ट  ब्रिज प्रोग्राम के माध्यम से 'मास्टर ऑफ़ डिज़ाइन' (M.Des.)  पूरा किया । अगस्त २०१३ से वह चेन्नई, में 'सह आचार्य' के पद पर कार्यरत, चित्रकला तथा फैशन डिज़ाइन के व्यावसायिक पाठ्यक्रम की शिक्षा एवं अनुसंधान से संबद्ध हैं । इनकी कई कविताएँ और शोध -पत्र प्रकाशित हो चुके हैं ।


कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम के इन लिंक पर उपलब्ध है :

फ्लिपकार्ट: http://www.flipkart.com/item/9789384419165

इन्फीबीम:http://www.infibeam.com/Books/parag-aur-pankhudiyan-hindi-seema-kumar/9789384419165.html

आपकी राय एवं सुझावों का इन्तज़ार रहेगा 

23.9.15

हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन

हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन
राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया गया किताब का लोकार्पण निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनिता मनोहर ने किया। विमोचन में संस्थान के उप निदेशक, मेरे पति एवं माता-पिता भी सहभागी रहे। किताब का प्रकाशन हिंद युग्म ने किया है।


22.9.15

निमंत्रण - मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन

हिन्दी पखवाड़ा से जुड़ कर अच्छा लगा । कुछ और बातें निफ्ट, चेन्नई, में हिन्दी पखवाड़ा में हिन्दी पखवाड़ा और मुझसे जुड़ी ।

"पराग और पंखुड़ियाँ"

मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि २३ सितम्बर २०१५ को हिन्दी पखवाड़ा के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ साथ निफ्ट, चेन्नई, में मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया जाएगा ।



"पराग और पंखुड़ियाँ" का आवरण 

१० से २३ सितम्बर २०१५ तक राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ काव्यात्मक एवं संगीतमय संध्या में आप सादर आमंत्रित हैं ।

दिनांक एवं समय: २३ सितम्बर २०१५, ३:३० - ५:३० अपराह्न

- काव्यात्मक एवं संगीतमय संध्या
- पुस्तक –विमोचन: श्रीमती सीमा कुमार की हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का विमोचन
- पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह

निमंत्रण

**अक्टूबर २०१५:
मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर भी पर उपलब्ध है | कृपया पढ़कर अपनी राय अवश्य दें:

फ्लिपकार्ट: http://www.flipkart.com/item/9789384419165

इन्फीबीमhttp://www.infibeam.com/Books/parag-aur-pankhudiyan-hindi-seema-kumar/9789384419165.html

14.9.15

'हिन्दी दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएँ

'हिन्दी दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएँ |


१४ सितम्बर को हम हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं, यह आपको ज्ञात होगा | राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में १० से २३ सितम्बर २०१५ तक हिन्दी पखवाड़ा  मनाया  जा रहा है । इस अवसर पर हिन्दी समिति और साहित्यिक संघ, निफ्ट, चेन्नई, द्वारा निफ्ट परिसर में छात्र, कर्मचारी एवं शिक्षकों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं | सभी प्रतियोगिताओं के लिए नकद पुरस्कार जीता जा सकता है |
  • पोस्टर डिजाइन प्रतियोगिता
  • लघु कहानी / सृजनात्मक लेखन 
  • हिन्दी कविता प्रतियोगिता
  • निबन्ध 
  • प्रश्नोत्तरी
  • हिन्दी सुलेखन 
  • रचनात्मक विज्ञापन

मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि २३ सितम्बर २०१५ को पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ साथ निफ्ट, चेन्नई, में मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया जाएगा । 

14.2.13

नन्हा सा पल

मेरे एक पल ने
आज फिर मुझसे कहा है
मैं तुम्हारे संग
अपना वह
नन्हा सा पल बाँट लूँ
जो अब तक
बस मेरा होकर रहा है ।
वह पल
जिसमें सिर्फ मैं हूँ,
वह नन्हें कण सा
नन्हा पल
जिसमें सिमट कर
मैं भी एक कण सी
हो गई हूँ
और उसमें सिमट गए हैं
मेरे दुःख-सुख,
मेरे आँसू और खुशी,
आशा और निराशा,
प्रेम और नफरत,
दर्द और चुभन,
तृष्णा और अभिलाषा,
उल्लास और अवसाद ।

वह पल
बस मेरा ही होकर
नहीं रहना चाहता
वह तुम्हारा भी होना चाहता है ।
तुम्हारा भी तो
ऐसा ही नन्हें कण सा
कोई पल होगा,
तुम्हारा बिल्कुल अपना,
केवल तुम्हारा पल ... ।
क्या बाँटोगे
मेरे पल के साथ
तुम अपना पल ?


- सीमा कुमार
१६/६/२००१

* यह कविता 'हिन्द-युग्म' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं | 

22.11.12

बादल का एक टुकड़ा

मैं
बादल का
एक टुकड़ा हूँ
और तुम
बरखा की शीतल बूँदें |
मैं
खाली - खाली सा
बादल का एक टुकड़ा
और तुम्हारा प्यार
बादल टुकडे को
भर देने वाली,
उसे उसका स्वरूप देने वाली
जल की असंख्य बूँदें |
मैं
बादल का
एक छोटा सा टुकड़ा
और तुम
मेरा पूरा आसमान,
मैं
सीमाओं से निर्मित
और तुम अनंत आकाश

- सीमा कुमार
१७/६/९९

* यह कविता 'हिन्द-युग्म' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं | 

2.10.12

सफ़र अभी है बाकी


स्वराज से सुराज तक 
विभाजन से मिलाप तक
मेरी मातृभूमि का अभी
लंबा सफर है बाकी।

तंदूर से उत्थान तक 
अशिक्षा से ज्ञान तक
कई अंधेरे कोनों में 
उजाला फैलाना है बाकी।

तय किए साठ बरस 
सफ़र लंबा था मगर 
ऊँचे-नीचे रास्तों पर अभी 
अनन्त का सफर है बाकी। 

मिलती गई कई मंज़िलें 
ऊँचे रहे हम उड़ते 
सोने की चिड़िया की फिर भी
बहुत उड़ान अभी है बाकी। 

- सीमा कुमार
१४ अगस्त , २००७

* यह कविता 'हिन्द-युग्म' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं | 

25.8.12

अंतर्द्वन्द्व

मैं हर दिन
तारों सी झिलमिल ।
आँखें मेरी
सदैव स्वपनिल -
रोज पूछती मुझसे
आज कौन सा
स्वप्न सजाऊँ ?
मिटाना है तुम्हें
कौन सा अंधियारा ?
किस अंतर्द्वन्द्व में
दीप जलाऊँ,
करे जो रौशन
और आशान्वित राहें ।

रोज़ जलाती हूँ खुद को
रोज़ प्रज्वलित
होती है एक आग
इस आशा में -
स्वयं के ही
हवन कुंड में
स्वाहा हो जाऊँ
और उस राख से
पुनर्निमित हो
निकल आऊँ निर्मल मैं ।
फीनिक्स की तरह ।

देह - विकार, कष्ट, क्लेश,
लोभ, क्षोभ और अंतर्द्वन्द्व
नहीं मिटते इस जीवन में ।
कभी - कभी मिट जाता है
आत्मा का एहसास ।
नहीं मिटती क्यों
अपने ही दुर्गुणों की,
दुर्बलताओं की पोथी ?
क्यों पन्ने उसमें हर दिन
जुड़ते ही जाते ?
क्या हर अर्जुन को
मिलते हैं कृष्ण ?
और जो अर्जुन
पांडव - बहन होती
तब भी क्या उसे
मिलते कृष्ण,
मिलती गीता ?


- सीमा कुमार
४ सितंबर २००७

यह कविता 'हिन्द-युग्म' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं | 

26.7.12

हर लम्हा एक विस्मय

ठहरा हुआ पानी
एक छोटा सा कंकड़
या एक हल्का सा स्पर्श
और उठी असंख्य, अनगिनत लहरें;
पानी की सतह पर
खिली असंख्य तरंगें.. ।

लहरें मेरी ओर आती रहीं
और वापस जा कहीं दूर
विलीन होती रहीं ।
तट पर खड़ी मैं
उन अनगिनत लहरों को
एक एक कर
गिनने की कोशिश करती रही ।

मेरे स्याह केश को
उड़ाता हुआ निकल चला
आकाररहित पवन
और जागी एक तीव्र इच्छा
उस शक्लरहित पवन को
आलिंगन में लेने की ।

वक्त रेत की तरह
फिसलता रहा
मेरी भिंची हुई मुठ्ठियों से
और मैं रेत के एक-एक कण को
बिना आहट
फर्श पर तरलता से
बिखरते देखती रही ।

बगिया के
खिले हुए फूलों के बीच
हुआ एहसास
यह कोमल पंखुड़ियाँ
हैं बस कुछ पल के मेहमान ।
उनकी मोहक खुशबू ने कहा
उठा लो आनंद
इससे पहले कि मैं
हो जाऊँ लुप्त ।

यह सभी याद दिलाते रहे
दोहराते रहे मुझसे -
जीयो, प्रेम करो,
हो उत्क्रांत और
करो आत्म-उत्थान,
हो आनंदित
और संजो कर रखो
हर नन्हें पल को
वक्त के हर कतरे को
क्योंकि हर लम्हा
अपने आप में
है एक चमत्कार,
एक विस्मय ।

- सीमा कुमार
२० जुलाई, २००७

यह कविता 'हिन्द-युग्म' पर प्रथम प्रकाशित हुई और वहां पढ़ी जा सकती हैं | 
  
 'हर लम्हा एक विस्मय' लिखा था अंग्रेज़ी में (Each Moment is a Wonder ) और अनुवाद हिन्दी में ।  कविता के पीछे की कहानी यहां है |