1.2.06

और भी हैं रास्ते

आज
शब्दों-छन्दों की दुनिया ने
फिर से मुझे पुकारा है /
जिन्दगी जो बाकी है
तो आँखों में सपने
अभी और भी हैं /
फिर से राहें कहती हैं
आओ,
कदम बढाओ,
पाने को मंजिलें
अभी और भी हैं /
मंजिलें जो हासिल हैं
वहाँ से शुरू होते
नई मंजिलों की ओर
रास्ते अभी और भी हैं /

- सीमा कुमार
२४ जनवरी, २००६

2 comments:

अनूप शुक्ला said...

सीमाजी आपका स्वागत है हिंदी ब्लाग जगत में।

Seema Kumar said...

धन्यवाद अनूप जी |