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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें

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प्रकृति की सुन्दरता फूलों से | स्क्रीन सेवर बनाएं और आनंद लें | 

प्रकृति और पंक्षियों को अर्पित मेरी कृति

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प्रकृति और पंक्षियों को अर्पित - वस्त्रों ( टी-शर्ट्स ) के लिए मेरी कृति : वीडियो - प्रकृति और पंक्षियों से प्रेरित डिज़ाइन:  और पढ़ें ... फेसबुक इंस्टाग्राम वेबसाइट   ---

नव वर्ष २०२१ मंगलमय हो

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 नव वर्ष २०२१ मंगलमय हो | मिथिला मधुबनी चित्रकला को अर्पित :  फेसबुक : https://www.facebook.com/MithilaMadhubaniArtBySK इंस्टाग्राम  : https://www.instagram.com/MithilaMadhubaniArt

कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट और इन्फीबीम पर उपलब्ध

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कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब  फ्लिपकार्ट   और   इन्फीबीम   पर उपलब्ध मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब  फ्लिपकार्ट  और  इन्फीबीम  पर भी उपलब्ध है ।  कृपया पढ़कर अपनी राय अवश्य दें: मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ फ्लिपकार्ट   और   इन्फीबीम   पर उपलब्ध जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट में  लिखा था राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई , में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा 2015 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ मेरी (सीमा कुमार, सह आचार्य, निफ्ट, चेन्नई)  हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया गया। किताब का लोकार्पण निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनिता मनोहर ने किया। विमोचन में संस्थान के उप निदेशक, मेरे पति एवं माता-पिता भी सहभागी रहे। किताब का प्रकाशन हिंद युग्म प्रकाशन, नई दिल्ली, ने किया है।  विमोचन के दौरान निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनीता मनोहर द्वारा हिन्द युग्म प्रकाशन के श्री शैलेश भारतवासी का स्वागत  ...

हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन

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हिन्दी कविता-संग्रह “ पराग और पंखुड़ियाँ ” का पुस्तक विमोचन राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन  भी किया गया  |  किताब का लोकार्पण निफ्ट, चेन्नई, की निदेशिका डॉ. अनिता मनोहर ने किया। विमोचन में संस्थान के उप निदेशक, मेरे पति एवं माता-पिता भी सहभागी रहे। किताब का प्रकाशन हिंद युग्म ने किया है। ---- ----

निमंत्रण - मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन

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हिन्दी पखवाड़ा से जुड़ कर अच्छा लगा । कुछ और बातें निफ्ट, चेन्नई, में हिन्दी पखवाड़ा में हिन्दी पखवाड़ा और मुझसे जुड़ी । "पराग और पंखुड़ियाँ" मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि २३ सितम्बर २०१५ को  हिन्दी पखवाड़ा  के  पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ साथ निफ्ट, चेन्नई, में मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का पुस्तक विमोचन भी किया जाएगा । "पराग और पंखुड़ियाँ" का आवरण  १० से २३ सितम्बर २०१५ तक राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ काव्यात्मक एवं संगीतमय संध्या में आप सादर आमंत्रित हैं । दिनांक एवं समय: २३ सितम्बर २०१५, ३:३० - ५:३० अ पराह्न - काव्यात्मक एवं संगीतमय संध्या - पुस्तक –विमोचन: श्रीमती सीमा कुमार की हिन्दी कविता-संग्रह “पराग और पंखुड़ियाँ” का विमोचन - पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह निमंत्रण **अक्टूबर २०१५: मेरी कविता संग्रह ‘पराग और पंखुड़ियाँ’ अब फ्लिपकार्ट   और इन्फीबीम पर भी पर उपलब्ध है | कृपया पढ़कर अपनी राय अ...

'हिन्दी दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएँ

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'हिन्दी दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएँ | १४ सितम्बर को हम हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं, यह आपको ज्ञात होगा | राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान, चेन्नई, में १० से २३ सितम्बर २०१५ तक हिन्दी पखवाड़ा  मनाया  जा रहा है । इस अवसर पर हिन्दी समिति और साहित्यिक संघ, निफ्ट, चेन्नई, द्वारा निफ्ट परिसर में छात्र, कर्मचारी एवं शिक्षकों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं | सभी प्रतियोगिताओं के लिए नकद पुरस्कार जीता जा सकता है | पोस्टर डिजाइन प्रतियोगिता लघु कहानी / सृजनात्मक लेखन  हिन्दी कविता प्रतियोगिता निबन्ध  प्रश्नोत्तरी हिन्दी सुलेखन  रचनात्मक विज्ञापन मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि २३ सितम्बर २०१५ को पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ साथ निफ्ट, चेन्नई, में मेरी हिन्दी कविता-संग्रह “ पराग और पंखुड़ियाँ ” का पुस्तक विमोचन भी किया जाएगा । 

निफ्ट, चेन्नई, में हिन्दी पखवाड़ा

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नन्हा सा पल

मेरे एक पल ने आज फिर मुझसे कहा है मैं तुम्हारे संग अपना वह नन्हा सा पल बाँट लूँ जो अब तक बस मेरा होकर रहा है । वह पल जिसमें सिर्फ मैं हूँ, वह नन्हें कण सा नन्हा पल जिसमें सिमट कर मैं भी एक कण सी हो गई हूँ और उसमें सिमट गए हैं मेरे दुःख-सुख, मेरे आँसू और खुशी, आशा और निराशा, प्रेम और नफरत, दर्द और चुभन, तृष्णा और अभिलाषा, उल्लास और अवसाद । वह पल बस मेरा ही होकर नहीं रहना चाहता वह तुम्हारा भी होना चाहता है । तुम्हारा भी तो ऐसा ही नन्हें कण सा कोई पल होगा, तुम्हारा बिल्कुल अपना, केवल तुम्हारा पल ... । क्या बाँटोगे मेरे पल के साथ तुम अपना पल ? - सीमा कुमार १६/६/२००१ * यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहां  पढ़ी जा सकती हैं | 

बादल का एक टुकड़ा

मैं बादल का एक टुकड़ा हूँ और तुम बरखा की शीतल बूँदें | मैं खाली - खाली सा बादल का एक टुकड़ा और तुम्हारा प्यार बादल टुकडे को भर देने वाली, उसे उसका स्वरूप देने वाली जल की असंख्य बूँदें | मैं बादल का एक छोटा सा टुकड़ा और तुम मेरा पूरा आसमान, मैं सीमाओं से निर्मित और तुम अनंत आकाश - सीमा कुमार १७/६/९९ * यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहां  पढ़ी जा सकती हैं | 

सफ़र अभी है बाकी

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स्वराज से सुराज तक  विभाजन से मिलाप तक मेरी मातृभूमि का अभी लंबा सफर है बाकी। तंदूर से उत्थान तक  अशिक्षा से ज्ञान तक कई अंधेरे कोनों में  उजाला फैलाना है बाकी। तय किए साठ बरस  सफ़र लंबा था मगर  ऊँचे-नीचे रास्तों पर अभी  अनन्त का सफर है बाकी।  मिलती गई कई मंज़िलें  ऊँचे रहे हम उड़ते  सोने की चिड़िया की फिर भी बहुत उड़ान अभी है बाकी।  - सीमा कुमार १४ अगस्त , २००७ * यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहां  पढ़ी जा सकती हैं | 

अंतर्द्वन्द्व

मैं हर दिन तारों सी झिलमिल । आँखें मेरी सदैव स्वपनिल - रोज पूछती मुझसे आज कौन सा स्वप्न सजाऊँ ? मिटाना है तुम्हें कौन सा अंधियारा ? किस अंतर्द्वन्द्व में दीप जलाऊँ, करे जो रौशन और आशान्वित राहें । रोज़ जलाती हूँ खुद को रोज़ प्रज्वलित होती है एक आग इस आशा में - स्वयं के ही हवन कुंड में स्वाहा हो जाऊँ और उस राख से पुनर्निमित हो निकल आऊँ निर्मल मैं । फीनिक्स की तरह । देह - विकार, कष्ट, क्लेश, लोभ, क्षोभ और अंतर्द्वन्द्व नहीं मिटते इस जीवन में । कभी - कभी मिट जाता है आत्मा का एहसास । नहीं मिटती क्यों अपने ही दुर्गुणों की, दुर्बलताओं की पोथी ? क्यों पन्ने उसमें हर दिन जुड़ते ही जाते ? क्या हर अर्जुन को मिलते हैं कृष्ण ? और जो अर्जुन पांडव - बहन होती तब भी क्या उसे मिलते कृष्ण, मिलती गीता ? - सीमा कुमार ४ सितंबर २००७ यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहां  पढ़ी जा सकती हैं | 

हर लम्हा एक विस्मय

ठहरा हुआ पानी एक छोटा सा कंकड़ या एक हल्का सा स्पर्श और उठी असंख्य, अनगिनत लहरें; पानी की सतह पर खिली असंख्य तरंगें.. । लहरें मेरी ओर आती रहीं और वापस जा कहीं दूर विलीन होती रहीं । तट पर खड़ी मैं उन अनगिनत लहरों को एक एक कर गिनने की कोशिश करती रही । मेरे स्याह केश को उड़ाता हुआ निकल चला आकाररहित पवन और जागी एक तीव्र इच्छा उस शक्लरहित पवन को आलिंगन में लेने की । वक्त रेत की तरह फिसलता रहा मेरी भिंची हुई मुठ्ठियों से और मैं रेत के एक-एक कण को बिना आहट फर्श पर तरलता से बिखरते देखती रही । बगिया के खिले हुए फूलों के बीच हुआ एहसास यह कोमल पंखुड़ियाँ हैं बस कुछ पल के मेहमान । उनकी मोहक खुशबू ने कहा उठा लो आनंद इससे पहले कि मैं हो जाऊँ लुप्त । यह सभी याद दिलाते रहे दोहराते रहे मुझसे - जीयो, प्रेम करो, हो उत्क्रांत और करो आत्म-उत्थान, हो आनंदित और संजो कर रखो हर नन्हें पल को वक्त के हर कतरे को क्योंकि हर लम्हा अपने आप में है एक चमत्कार, एक विस्मय । - सीमा कुमार २० जुलाई, २००७ यह कविता ' हिन्द-युग्म ' पर प्रथम प्रकाशित हुई और  वहा...

उड़ान

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माँ तुमने मुझे जब उड़ना सिखाया था क्या तुम्हें एहसास था एक दिन तुमसे दूर जा बसूँगी अपने नए घोंसले में, नए परिवार के साथ ? तुम्हें खुशी हुई होगी कि मेरे पंख अब मुझे दूर तक उड़ा ले जा सकते हैं, अपने रास्ते खुद तय कर सकूँगी अकेले भी.. । पर संशय तो होगा तुम्हें कहीं थक न जाऊँ, गिर न जाऊँ ... और डर भी होगा - जल्दी ही तुमसे दूर चली जाऊँगी । जब से मैं आई तुम्हारी दुनिया मेरे इर्द-गिर्द ही तो घूमती रही है । दिल थाम तो लेती होगी कि एक दिन तुम्हारा यही केंद्र विस्थापित हो जाएगा, चला जाएगा किसी और जीवन का केंद्र बनने । फिर भी, माँ, तुमने मुझे पूरी तरह पंख फैलाकर, स्वच्छंद होकर उड़ना सिखाया । तुमसे दूर जाकर भी तुम्हारा बसेरा सदैव याद आता और अकसर अपनी यादें तलाशने मैं लौट आती वहाँ ... । अब मेरी बारी है उड़ान सिखाने की और अब भी तुम्हारी ज़रूरत है ... तुम्हारे अनुभव की, वात्सल्य की, पथ-प्रदर्शन की, ताकि मैं भी बेहिचक हो, निर्भय हो, अपनी नन्हीं चिड़िया को और भी ऊँचा उड़ना सिखा सकूँ । -  सीमा कुमार ३ अक्टूबर, २००७ यह कविता ...

फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’ सिनेमा घरों में १६ दिसंबर २०११ को

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फ़िल्म -  'विद लव, दिल्ली ! ’ का गाना और विडीओ   यहाँ देखे |   गाने के  विडीओ निर्माण के बारे में जानकारी  : निर्देशक - आशुतोष मटेला  संगीत निर्माता - संजय चौधरी  गीत के बोल - अमिताभ वर्मा  गायक - शान और सारिका लाल  अभिनेता - आशीष लाल और अपूर्वा लाम्बा डी ओ पी - प्रेमानंद   नृत्य निर्देशक - गौरव अहलावत और अमित वेरलानी  कला निर्देशक - सुनील छाबड़ा  वी ऍफ़ एक्स टीम - रश्मि रंजन, रोहित शर्मा, वरुण चक्रवर्ती  थ्री डी एनीमेशन - रोहित गुरूरानी और अभिनव शर्मा  कास्ट्यूम डिजाइनर और फैशन स्टायलिस्ट - सीमा कुमार  ( मैं )  बैनर - रेडमैट रीव्ज़ फ़िल्मस प्राइवेट लिमिटेड फ़िल्म -  'विद लव, दिल्ली ! '  सिनेमा घरों में १६ दिसंबर २०११ को पूरे देश में आ रहा है | उम्मीद है आप सब देखने  ज़रूर आईयेगा |

फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’

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फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली ! ’ जिसके बारे में पहले यहाँ लिखा था , ये रही उसकी एक छोटी सी झलक यू ट्यूब पर  .. एक सपना जो अब पूरा होने जा रहा है | सपना मध्यमवर्गीय परिवारों के कुछ उद्यमी और महत्वाकांक्षी लोगों का जिनका फिल्मों से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था, पर कुछ करने की उमंग और जोश भरपूर था | न तो यह  सफ़र आसान था, न आई. आई. टी. दिल्ली से अभियांत्रिकी (इंजीनीयरिंग) करने के बाद अच्छी नौकरियां छोड़ देना परिवार के लिए आसान था,  न फिल्म बनाने के लिए खानदानी पैसा था और न युवाओं की पहली फिल्म मैं पैसे लगाने ले लिए कोई बड़ा निवेशक था | पर कहते हैं न 'बूँद - बूँद से सिन्धु बना है ' ... परिवार और दोस्तों ने अपने सामर्थ्य अनुसार भरपूर मदद की और उसी का नतीजा है की यह फिल्म बन पाना संभव हुआ |   उम्मीद है इस फिल्म की झलक तथा यह फिल्म  भी आपको पसंद आएगी | मेरी भी काफी उम्मीदें जुडी हैं इस फिल्म से | और क्यों न हो, मैं इसमें ' कास्ट्यूम डिजाइनर ' और ' फैशन स्टायलिस्ट ' जो हूँ |    कुछ तसवीरें आप  यहाँ भ...

डिजाईन, ग्राफिक्स और परिधान की कार्यशाला

गर्मियों का मौसम अन्दर बैठ कर कुछ पढने - सीखने का अच्छा समय होता है | छात्रों की तो छुट्टियां चल रही है पर मैं पिछले साल की तरह कुछ कार्यशाला चलाने की तैयारी करा रही हूँ   ' इंस्टिट्यूट ऑफ़ अपैरल मैनेजमेंट ' , गुडगाँव  में |  कुछ जानकारी यहाँ मेरे अंग्रेज़ी चिठ्ठे पर भी है   | जो कार्यशाला मैं करवा रही हूँ, उनमें से एक टी-शर्ट के ग्राफिक कला के ऊपर है, तो दूसरी एक चित्र / डिजाईन से परिधान की बारीकियां समझने और बनाने (टेक - पैक बनाने ) के ऊपर है ताकि एक  डिजाईनर अपनी कृति को वास्तविक परिधान में परिवर्तित करवा सके | डिजाईन, ग्राफिक्स और परिधान की बारीकियों में जो रुचि रखते हैं, वो इन कार्यशालाओं में भाग ले सकते हैं | अधिक जानकारी यहाँ भी मिल सकती है | 

'अपैरल डिजाईन एंड मरचैनडाईजिंग' - क्षात्रों का प्रदर्शन

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२०१० समाप्त होने जा रहा है | छात्रों के प्रथम सत्र की परीक्षाएं भी समाप्त हो गयी हैं | ' इंस्टिट्यूट ऑफ़ अपैरल मैनेजमेंट ' , गुडगाँव, के 'अपैरल डिजाईन एंड मरचैनडाईजिंग', स्नातक के प्रथम सत्र के क्षात्रों ने अपना काम प्रदर्शित किया जिसके आधार पर उन्हें अंक दिए गए | उन्हें मैं चित्रकला (डिजाईन ड्राईंग) तथा डिजाईन के मूल तत्व (एलीमेंट्स ऑफ़ डिजाईन) पढ़ाती हूँ |  कई क्षात्रों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा जबकी कई क्षात्र और अच्छा कर सकते थे अगर उन्होंने थोड़ा और समय और ध्यान दिया होता | नीचे है उनमें से कुछ प्रदर्शित कृतियाँ | 

फ़िल्म - ’विथ लव, दिल्ली!’

पिछले साल आशीष ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और फिल्में बनाने और उसमें मुख्य भूमिका निभाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए जी जान से लग गया | आखिरकार उसका पहला बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हुआ  ’ विथ लव , दिल्ली! ’| आशीष   आई.आई.टी. दिल्ली स्नातक है | साथ ही इस फिल्म का एक और निर्माता आशुतोष मटेला एवं   निर्देशक निखिल सिंह भी  आई.आई.टी. दिल्ली स्नातक है और ये सभी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं  |  मुझे पूरा भरोसा हैं की यह समूह बहुत ही अच्छा काम करेगा | कुछ दिनों से मैं भी   व्यस्त थी क्योंकि मैं इसमें ' कोसट्यूम   डिजाइनर ' हूँ | इसमें मुख्य कलाकार हैं टॉम आल्टर , किरण कुमार एवं सीमा बिस्वास एवं नए कलाकार जिन्हें इस फिल्म में उतारा गया है वो हैं आशीष लाल और परिवा   प्रणति | फिल्म की शूटिंग दिल्ली में चल रही है |  फिल्म के बारे में कुछ और   जानकारी जो प्रेस को भी जारी की गयी हैं :- फ़िल्म - ’ विथ लव , दिल्ली! ’ फ़िल्म ’ विथ लव , दिल्ली! ’ एक रोचक ’ थ्रिलर ’ डोक्युमेंटरी - ड्रामा है । इस फ़िल्म में लगभग ३५ ऐ...