1.2.06

चाहत कम नही होती

कहानियाँ पुरानी हो चली
पर यादें पुरानी नहीं होतीं /

दीवारों पर
नए रंग चढ गए हैं,
इमारतें पुरानी हो चली हैं,
पीढ़ियाँ बदल गई हैं
पर इंसानों की
कश्मकश कम नहीं होती /

रंग फीके पड़ते जाते हैं
पर रंगों को
तरो-ताज़ा रखने की
चाहत कम नही होती /

- सीमा कुमार
३१ जनवरी, २००६

2 comments:

sarika saxena said...

बहुत सुन्दर लिखा है।
आपका स्वागत है हिन्दी ब्लाग जगत में।

Seema Kumar said...

धन्यवाद | बस एक कोशिश है ...