22.9.07

नई प्रविष्टियाँ

यह रही मेरी बिटिया जो माँ के लिए रोटियाँ बना रही है - और देखिए बाल-उद्यान पर ।




और यह कुछ पंक्तियाँ यूँ ही बैठे - बैठे .. कुछ गलतियाँ भी रह गई हैं ।

3 comments:

Udan Tashtari said...

प्यारी तेजल को बहुत प्यार. बहुत ही क्यूट है. कल तो बहुत तस्वीर थीं, सब अलग क्यूँ कर ली?

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

tanha kavi said...

एक रोटी हम भी खाएँगे। एक ज्यादा बनाना तेजल :)

-V.D.