कैसे लिखूँ कुछ
आज शब्द मानो
पंख लगा
उड़ जाते हैं ।
भागूँ जब मैं
पीछे उनके
किसी अनजान दिशा
मुड़ जाते हैं ।
- सीमा
28 नवम्बर, 1994
26.2.06
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2 टिप्पणियां:
सीमा जी, कहीं पर आपकी एक टिप्पणी देखी थी जो मुझे बहुत पसन्द आयी थी |
आपने प्रश्न किया है , "क्या लिखूँ ?" | तो मेरा निवेदन है कि कभी-कभी अपनी पसन्द के विषयों पर गद्य मे भी लिखकर अपने विचार-आलोक से इस चिट्ठाजगत को आलोकित करती रहें |
अनुनाद
धन्यवाद अनुनाद जी |
सच कहूँ तो जो भाव आते हैं, उन्हें शब्दों में अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ | गद्य या पद्य सोचकर नहीं | वैसे गद्य लिखने की इच्छा अवश्य है परंतु घर एवँ दफ्तर के बीच कितना समय निकालना संभव है मालूम नहीं | हिन्दी में टाइप करना भी तो आसान नहीं ...अधिक समय लगता है | कोशिश अवश्य करूंगी |
- सीमा
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