24.11.11

फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’ सिनेमा घरों में १६ दिसंबर २०११ को



गाने के विडीओ निर्माण के बारे में जानकारी :
  • निर्देशक - आशुतोष मटेला 
  • संगीत निर्माता - संजय चौधरी 
  • गीत के बोल - अमिताभ वर्मा 
  • गायक - शान और सारिका लाल 
  • अभिनेता - आशीष लाल और अपूर्वा लाम्बा
  • डी ओ पी - प्रेमानंद 
  •  नृत्य निर्देशक - गौरव अहलावत और अमित वेरलानी 
  • कला निर्देशक - सुनील छाबड़ा 
  • वी ऍफ़ एक्स टीम - रश्मि रंजन, रोहित शर्मा, वरुण चक्रवर्ती 
  • थ्री डी एनीमेशन - रोहित गुरूरानी और अभिनव शर्मा 
  • कास्ट्यूम डिजाइनर और फैशन स्टायलिस्ट - सीमा कुमार ( मैं ) 
  • बैनर - रेडमैट रीव्ज़ फ़िल्मस प्राइवेट लिमिटेड
फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!सिनेमा घरों में १६ दिसंबर २०११ को पूरे देश में आ रहा है | उम्मीद है आप सब देखने  ज़रूर आईयेगा |

13.10.11

फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’


फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’ जिसके बारे में पहले यहाँ लिखा था, ये रही उसकी एक छोटी सी झलक यू ट्यूब पर .. एक सपना जो अब पूरा होने जा रहा है | सपना मध्यमवर्गीय परिवारों के कुछ उद्यमी और महत्वाकांक्षी लोगों का जिनका फिल्मों से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था, पर कुछ करने की उमंग और जोश भरपूर था | न तो यह  सफ़र आसान था, न आई. आई. टी. दिल्ली से अभियांत्रिकी (इंजीनीयरिंग) करने के बाद अच्छी नौकरियां छोड़ देना परिवार के लिए आसान था,  न फिल्म बनाने के लिए खानदानी पैसा था और न युवाओं की पहली फिल्म मैं पैसे लगाने ले लिए कोई बड़ा निवेशक था | पर कहते हैं न 'बूँद - बूँद से सिन्धु बना है ' ... परिवार और दोस्तों ने अपने सामर्थ्य अनुसार भरपूर मदद की और उसी का नतीजा है की यह फिल्म बन पाना संभव हुआ |  


उम्मीद है इस फिल्म की झलक तथा यह फिल्म भी आपको पसंद आएगी | मेरी भी काफी उम्मीदें जुडी हैं इस फिल्म से | और क्यों न हो, मैं इसमें 'कास्ट्यूम डिजाइनर' और 'फैशन स्टायलिस्ट' जो हूँ |   

कुछ तसवीरें आप यहाँ भी देख सकते हैं |  फ़िल्म - 'विद लव, दिल्ली!’ के बारे में  इसके वेबसाइट, फ़ेसबुक, ट्विट्टर, यू ट्यूब पर भी जानकारी मिल सकती है | आशीष ने अपने अंग्रेज़ी चिठ्ठे पर भी काफी कुछ लिखा है | समाचारपत्र क्या कह रहे हैं वह आप यहाँ देख सकते हैं |

उम्मीद है जिस तरह  इस फिल्म को बनाने मैं बहुत लोगों का समर्थन मिला है, उससे कहीं अधिक इसे बेहद सफल बमेने में मिलेगा :) | 

अपने विचार और अपनी शुभकामना अवश्य दें | 

6.6.11

डिजाईन, ग्राफिक्स और परिधान की कार्यशाला

गर्मियों का मौसम अन्दर बैठ कर कुछ पढने - सीखने का अच्छा समय होता है | छात्रों की तो छुट्टियां चल रही है पर मैं पिछले साल की तरह कुछ कार्यशाला चलाने की तैयारी करा रही हूँ  'इंस्टिट्यूट ऑफ़ अपैरल मैनेजमेंट' , गुडगाँव में | 

कुछ जानकारी यहाँ मेरे अंग्रेज़ी चिठ्ठे पर भी है  | जो कार्यशाला मैं करवा रही हूँ, उनमें से एक टी-शर्ट के ग्राफिक कला के ऊपर है, तो दूसरी एक चित्र / डिजाईन से परिधान की बारीकियां समझने और बनाने (टेक - पैक बनाने ) के ऊपर है ताकि एक डिजाईनर अपनी कृति को वास्तविक परिधान में परिवर्तित करवा सके | डिजाईन, ग्राफिक्स और परिधान की बारीकियों में जो रुचि रखते हैं, वो इन कार्यशालाओं में भाग ले सकते हैं | अधिक जानकारी यहाँ भी मिल सकती है | 

28.12.10

'अपैरल डिजाईन एंड मरचैनडाईजिंग' - क्षात्रों का प्रदर्शन

२०१० समाप्त होने जा रहा है | छात्रों के प्रथम सत्र की परीक्षाएं भी समाप्त हो गयी हैं | 'इंस्टिट्यूट ऑफ़ अपैरल मैनेजमेंट' , गुडगाँव, के 'अपैरल डिजाईन एंड मरचैनडाईजिंग', स्नातक के प्रथम सत्र के क्षात्रों ने अपना काम प्रदर्शित किया जिसके आधार पर उन्हें अंक दिए गए | उन्हें मैं चित्रकला (डिजाईन ड्राईंग) तथा डिजाईन के मूल तत्व (एलीमेंट्स ऑफ़ डिजाईन) पढ़ाती हूँ |  कई क्षात्रों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा जबकी कई क्षात्र और अच्छा कर सकते थे अगर उन्होंने थोड़ा और समय और ध्यान दिया होता | नीचे है उनमें से कुछ प्रदर्शित कृतियाँ | 


3.9.10

फ़िल्म - ’विथ लव, दिल्ली!’


पिछले साल आशीष ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और फिल्में बनाने और उसमें मुख्य भूमिका निभाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए जी जान से लग गया | आखिरकार उसका पहला बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हुआ ’विथ लव, दिल्ली!’| आशीष आई.आई.टी. दिल्ली स्नातक है | साथ ही इस फिल्म का एक और निर्माता आशुतोष मटेला एवं निर्देशक निखिल सिंह भी  आई.आई.टी. दिल्ली स्नातक है और ये सभी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं | मुझे पूरा भरोसा हैं की यह समूह बहुत ही अच्छा काम करेगा |

कुछ दिनों से मैं भी व्यस्त थी क्योंकि मैं इसमें 'कोसट्यूम डिजाइनर' हूँ | इसमें मुख्य कलाकार हैं टॉम आल्टर, किरण कुमार एवं सीमा बिस्वास एवं नए कलाकार जिन्हें इस फिल्म में उतारा गया है वो हैं आशीष लाल और परिवा प्रणति | फिल्म की शूटिंग दिल्ली में चल रही है


फिल्म के बारे में कुछ और जानकारी जो प्रेस को भी जारी की गयी हैं :-

फ़िल्म - विथ लव, दिल्ली!

फ़िल्म विथ लव, दिल्ली!एक रोचक थ्रिलरडोक्युमेंटरी - ड्रामा है । इस फ़िल्म में लगभग ३५ ऐतिहासिक इमारतों और पर्यटक स्थलों को दिखाया गया है । रेड डिजिटल फ़िल्म कैमरे से फ़िल्माई जा रही लगभग ९० मिनट की इस फ़िल्म का प्रोडक्शन बजट किसी बौलीवुड फ़िल्म जैसा है । इसमें पर्यटक स्थलों और स्मारकों के इतिहास को एक रोचक और रोमांचक कहानी में पिरोया गया है । यह एक साधारण पर्यटक डोक्युमेंटरी फ़िल्म नहीं है जिसमें एक स्मारक को दिखा कर किताबी तरीके से उसका इतिहास बताया जाता है । इस फ़िल्म की कहानी किसी बहुत ही रोचक व्यावसायिक बौलीवुड फ़िल्म की कहानी जैसी है जिसके माध्यम से पर्यटक स्थलों का इतिहास बताया गया है ।


*’रेडमैट रीव्ज़ टूरिज़्म फ़िल्मस प्राइवेट लिमिटेडकम्पनी की स्थापना भारत के विभिन्न पर्यटक स्थलों के ऊपर फ़िल्म बनाने के एकमात्र उद्देश्य से की गयी है ।

* इस कम्पनी का लक्ष्य आने वाले सालों में भारत के प्रत्येक भाग के विभिन्न पर्यटक स्थलों के ऊपर उच्च कोटि की फ़िल्में बना कर भारत को दुनिया के सबसे मनमोहक और लुभावने पर्यटक स्थलों की गिनती में लाना है । 

* ’रेडमैट रीव्ज़ टूरिज़्म फ़िल्मस प्राइवेट लिमिटेड’ ’रेडमैट एन्टरटेन्मेंट प्राइवेट लिमिटेडसे जुड़ी हुई है जो दिल्ली और मुम्बई स्थित ५ बर्ष पुरानी फ़िल्म प्रोडक्शन कम्पनी है ।

* रेडमैट की स्थपना देश के सर्वोत्तम टेक्नोक्क्रैटस द्वारा की गयी है - आई.आई.टी. दिल्ली स्नातक, चारटर्ड अकाउंटेट, पूर्व आर्मी आफ़सर एवं उच्च कोटि सेल्स टीम । 

* पिछले पांच सालों में रेड्मैट ने विभिन्न सन्स्थाओं के लिए काम किया है -  सरकारी सन्स्थान जैसे बिहार सरकार; कारपोरेट्स जैसे गोदरेज, ब्रिटानिया, कैसट्रोल, सैमसंग, इत्यादि; अन्तर्राष्ट्रीय सन्स्थान जैसे यू.एन.ओ., यू.के. सरकार, एल.जी. ग्रुप ।

* रेडमैट ने सदैव उच्च स्तर की सराहनीय फ़िल्में बनाई है जो उसके दर्शकों की उम्मीदों से बढ़कर रही है । कम से कम समय सीमा में भी रेडमैट ने क्लाइन्ट्स के अनुसार समय पर फ़िल्में पूरी की है । इसे संभव किया है उच्च कोटि के शिक्षित और समर्पित समूह ने जो इस कम्पनी के पीछे है ।

8.5.09

18.4.09

अभिव्यक्ति की असमर्थता

अंत और अनंत क्या,
उर की अभिलाषा क्या ?
मन क्यों स्थिर नहीं,
जीवन की परिभाषा क्या ?


प्रश्न भी अनंत हैं
अनकहे हैं
जवाब कभी हैं ही नहीं,
कहीं अधूरे हैं ।
मौन लगता अचल है ।
बस अपनी
अंतर्रात्मा का
साथ ही चिरंतन है,
बाकी या तो इच्छा है
लालसा है
या न मिटने वाली चाह है ।

मोह क्या है,
माया है क्या ?
सत्य क्या है,
साया है क्या ?
फिर अनगिनत सवाल,
या तो असंख्य जवाब,
या फिर कोई भी नहीं
कहीं सिर्फ़ गति है
कोई ठहराव नहीं
और कहीं बस
ठहराव ही है
कोई गति, कोई हलचल नहीं ।

यह शब्द हैं
या भाव ?
या उलझन ?
अभिव्यक्ति की असमर्थता ?


- सीमा कुमार
३१ मार्च २००७

हिन्द युग्म पर यहाँ पूर्व-प्रकाशित

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